कुछ गड्ढे भरने से नहीं छिपेगी सड़क की बदहाली, पखांजूर से दुर्गकोंदल मार्ग पर जनता अब भी परेशान
सड़क पीडब्ल्यूडी की, मरम्मत माइंस के भरोसे — आखिर विभाग कर क्या रहा है?

पीडब्ल्यूडी की सड़क, माइंस की मरम्मत! लगता है अब विभाग का नया ठेका—”काम कोई करे, नाम हमारा रहे!
पखांजूर।
पखांजूर से दुर्गकोंदल तक की सड़क इन दिनों गड्ढों से कम और चर्चाओं से ज्यादा भरी हुई है। सड़क लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की है, लेकिन कहीं-कहीं गड्ढे भरने का काम माइंस करती नजर आती है। ऐसे में जनता भी मजाक में पूछ रही है—
“आखिर सड़क पीडब्ल्यूडी की है या माइंस की?”
मामला ऐसा हो गया है कि सड़क सरकारी, गड्ढे जनता के, मरम्मत माइंस के भरोसे और जवाबदेही… शायद अब भी किसी फाइल में छुट्टी मना रही है। पीडब्ल्यूडी की चुप्पी और माइंस की सक्रियता देखकर लोग तंज कस रहे हैं कि
“लगता है विभाग ने सड़क के साथ अपनी जिम्मेदारी भी आउटसोर्स कर दी है।”
इधर कुछ जगह गड्ढे भरने का काम हुआ, उधर मानो प्रचार शुरू हो गया कि पूरी सड़क चमक उठी। लेकिन जो लोग रोज पखांजूर से दुर्गकोंदल तक सफर करते हैं, वे जानते हैं कि हकीकत अभी भी गड्ढों में ही नजर आती है। सड़क आज भी कई जगह वाहन चालकों के धैर्य और सस्पेंशन—दोनों की परीक्षा ले रही है।
अब माइंस भी अजीब स्थिति में है। सड़क उसकी नहीं, लेकिन कहीं-कहीं मरम्मत वही करा रही है। और पीडब्ल्यूडी शायद यह सोचकर निश्चिंत है कि
“जब कोई और गड्ढे भर रहा है, तो हमें क्या जल्दी है!”
यही बात लोगों के बीच चर्चा और व्यंग्य का विषय बन गई है। जनता को न तो फोटो खिंचवाने वाली मरम्मत चाहिए और न ही कागजों में बनने वाली सड़क। लोगों की मांग साफ है—पूरे पखांजूर–दुर्गकोंदल मार्ग की स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत हो तथा पीडब्ल्यूडी अपनी जिम्मेदारी निभाए।
वरना आने वाले दिनों में लोग कहीं यह नया बोर्ड न लगा दें—
“स्वागत है! आप पीडब्ल्यूडी की सड़क पर नहीं, गड्ढों के संग्रहालय में प्रवेश कर चुके हैं। रखरखाव: कभी विभाग, कभी माइंस!”



