सड़क किसकी, सरकार किसकी? जनता पूछ रही—निर्णय प्रशासन लेता है या माइंस?
सड़क सरकारी, जिम्मेदारी सरकारी, पर चर्चा है कि आदेश कहीं और से जारी। जनता बस इतना जानना चाहती है, लोकतंत्र चल रहा है या 'लोडतंत्र'?"

पखांजूर।
एक ओर क्षेत्र में स्टेट हाईवे-25 की बदहाल स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर सड़क मरम्मत के वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इससे आम लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर सड़कों की असली जिम्मेदारी किसकी है—सरकार की, लोक निर्माण विभाग की या फिर माइंस प्रबंधन की?
लोग व्यंग्य में कह रहे हैं कि अब ऐसा लगता है जैसे सरकारी विभाग केवल दर्शक बनकर रह गए हैं और सड़क पर क्या होगा, कब होगा और कैसे होगा, इसकी तस्वीरें पहले सोशल मीडिया पर दिखाई देती हैं। इससे कई सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि सड़क की मरम्मत हो रही है, तो क्या यह नियमित सरकारी व्यवस्था का हिस्सा है या किसी विशेष व्यवस्था के तहत हो रहा कार्य?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की स्थायी मरम्मत, ओवरलोड वाहनों की निगरानी और नियमों का पालन कराना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। यदि सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त होती है, तो उसके कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई भी होनी चाहिए।




