परलकोट की जीवनरेखा पर भारी वाहनों का कहर, हाईवे-25 पर सफर बनता जा रहा जोखिमभरा
पियूष मंडल

“सड़क रो रही, ट्रक दौड़ रहे! परलकोट की जनता पूछ रही—जिम्मेदार कौन?”
पखांजूर।
परलकोट क्षेत्र की प्रमुख सड़क स्टेट हाईवे-25 की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे, उखड़ चुकी डामर की परत और जर्जर होती पुलियाएं लोगों की चिंता का कारण बन गई हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सुरजागढ़ माइंस से निकलने वाले भारी एवं कथित ओवरलोड ट्रकों की लगातार आवाजाही ने सड़क की स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिस सड़क की मरम्मत पर कुछ समय पहले लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, वह अब फिर से उखड़ने लगी है। प्रतिदिन भारी वाहनों के गुजरने से सड़क की सतह टूट रही है और कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। इससे आम लोगों, स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि वाहनों का संचालन निर्धारित भार क्षमता के अनुरूप नहीं हो रहा है, तो इसकी नियमित जांच और निगरानी की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि ओवरलोड परिवहन पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो सड़क के साथ-साथ पुराने पुल और पुलियाएं भी गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।
इस पूरे मामले में लोगों ने माइंस प्रबंधन से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा जताई है। उनका कहना है कि जिस मार्ग का उपयोग बड़े पैमाने पर खनिज परिवहन के लिए किया जा रहा है, उसकी सुरक्षा, मरम्मत और संरक्षण में भी आवश्यक सहयोग होना चाहिए। वहीं संबंधित विभागों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करें।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि स्टेट हाईवे-25 का तकनीकी सर्वे कराया जाए, भारी वाहनों की नियमित जांच हो, यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा सड़क और पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जाए।
“सड़कें केवल डामर और पत्थर का ढांचा नहीं होतीं,
इन्हीं रास्तों से लोगों के सपने, बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की उम्मीदें गुजरती हैं।
उम्मीद है कि जिम्मेदार विभाग समय रहते चेतेंगे,
ताकि किसी हादसे के बाद जवाब देने की नौबत न आए।”




