18 चक्का गया तो 22 चक्का आ गया, परलकोट का धूल वाला मौसम और सुहाना हो गया। नेताओं के विकास के दावे अपनी जगह कायम हैं, जनता के हिस्से में फिलहाल धूल, गड्ढे और भारी वाहन हैं !
परलकोट में खिला है फूल, इसलिए खाइए सूरजगढ़ माइंस के ट्रकों की धूल!

नेताओं के विकास के दावे अपनी जगह कायम हैं, जनता के हिस्से में फिलहाल धूल, गड्ढे और भारी वाहन हैं!

पखांजूर।
परलकोट क्षेत्र की लाइफ लाइन कही जाने वाली सड़क पर इन दिनों सूरजगढ़ माइंस के भारी वाहनों की आवाजाही लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है।

18 चक्का के बाद अब 22 चक्का ट्रकों की आवाजाही भी नजर आ रही है। भारी वाहनों के गुजरने से सड़क की हालत बिगड़ने के साथ धूल का गुबार भी उड़ रहा है, जिससे राहगीरों और आसपास के रहवासियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की क्षमता और भारी वाहनों के दबाव के बीच प्रशासन आखिर कब गंभीरता दिखाएगा।

हालात देखकर तो यही लगता है कि परलकोट में विकास की नई परिभाषा लिखी जा रही है—सड़क मिले न मिले, धूल जरूर मिल रही है।

जनता अब सवाल कर रही है कि भारी वाहनों की लगातार बढ़ती आवाजाही पर जिम्मेदार विभाग आखिर कब ठोस कदम उठाएंगे ?




