सड़क पर भारी बोझ, रेलवे लाइन पर क्यों नहीं विचार? एटापल्ली–सूरजागढ़–पखांजूर–केवटी रेल कॉरिडोर की जरूरत पर उठी आवाज
सूरजागढ़ माइंस के लिए रेलवे, जनता के लिए राहत—कब बनेगी योजना?

रेलवे लाइन बने तो सड़क भी बचे, जनता भी बचे
पखांजूर।
सूरजागढ़ माइंस से निकलने वाले खनिज का परिवहन वर्तमान में मुख्य रूप से भारी वाहनों के माध्यम से किया जा रहा है। इसका सीधा असर पखांजूर–दुर्गकोंदल मार्ग सहित आसपास की सड़कों पर दिखाई देता है। बरसात आते ही सड़कें जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, मरम्मत का सिलसिला शुरू होता है और आम जनता को हर साल वही परेशानी झेलनी पड़ती है।
ऐसे में अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि
क्या एटापल्ली–सूरजागढ़–पखांजूर–केवटी रेलवे लाइन पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाना चाहिए?
यदि इस मार्ग पर रेल परियोजना विकसित होती है, तो माइंस को खनिज परिवहन का बेहतर विकल्प मिलेगा, भारी ट्रकों का दबाव सड़कों पर कम होगा और आम जनता को भी सुरक्षित तथा सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकती है।
सबसे अहम बात यह है कि वर्तमान में
क्षेत्र के विधायक भारतीय जनता पार्टी के हैं, सांसद भी भारतीय जनता पार्टी के हैं, राज्य में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्र में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।
ऐसे में क्षेत्रवासियों की अपेक्षा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है कि इतने बेहतर राजनीतिक समन्वय के बीच इस तरह की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं पर ठोस पहल होगी।
यदि आज भी इस दिशा में कोई पहल नहीं होती, तो लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि फिर ऐसा अनुकूल अवसर आखिर कब आएगा? हर साल सड़कों की मरम्मत पर चर्चा होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास कम दिखाई देते हैं।
रेलवे लाइन बनने से केवल माइंस को ही लाभ नहीं होगा, बल्कि व्यापार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और पूरे परलकोट क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है।
सड़क पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी और सरकारी धन से बार-बार होने वाली मरम्मत की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
अब समय आ गया है कि केवल गड्ढे भरने की नहीं, बल्कि भविष्य की सोच के साथ विकास की नई पटरी बिछाने पर चर्चा हो। जनता अब यह जानना चाहती है
कि क्या एटापल्ली–सूरजागढ़–पखांजूर–केवटी रेलवे लाइन पर कोई ठोस पहल होगी, या फिर हर बरसात में सड़क और गड्ढों की वही पुरानी कहानी दोहराई जाती रहेगी?




