Telegram Join our Telegram Channel for Daily Latest News Updates! Join Now ×

10 फीट के विशाल अजगर की मौत, रेस्क्यू प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

पोस्टमार्टम में चोट का उल्लेख, दो दिन बाद मिला था मृत; रेस्क्यू के दौरान मौजूद कर्मचारियों और इस्तेमाल किए गए उपकरणों की जांच की मांग

पियूष मंडल

पखांजूर।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

पीव्ही-32 रामकृष्णपुर में करीब 10 फीट लंबे विशाल अजगर के रेस्क्यू के बाद हुई मौत का मामला अब वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारी के अनुसार, अजगर को रेस्क्यू किए जाने के करीब दो दिन बाद मृत पाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले में चोट का उल्लेख होने की बात सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर रेस्क्यू के दौरान अजगर को किस तरह संभाला गया था और क्या निर्धारित सुरक्षा एवं सावधानियों का पालन किया गया था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अजगर काफी बड़ा और भारी था। रेस्क्यू के दौरान स्थानीय समाजसेवी अपने द्वारा तैयार किए गए उपकरण की मदद से अजगर को पकड़ने और संभालने में सक्रिय नजर आए। मौके पर वन विभाग के कर्मचारी भी मौजूद बताए जा रहे हैं। ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि इतने बड़े वन्यजीव के रेस्क्यू के लिए विभाग की ओर से कौन-से मानक उपकरण और प्रशिक्षित कर्मी उपलब्ध थे।

पोस्टमार्टम में चोट, फिर भी जवाबदेही किसकी?

अजगर की मौत के कारण के रूप में पोस्टमार्टम में चोट का उल्लेख होने की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग से यह स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है कि चोट रेस्क्यू से पहले लगी थी या रेस्क्यू के दौरान अथवा उसके बाद। केवल पोस्टमार्टम में चोट का उल्लेख होना अपने आप में किसी व्यक्ति की लापरवाही साबित नहीं करता, लेकिन घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जरूर पैदा करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी संरक्षित वन्यजीव के रेस्क्यू के दौरान चोट लगती है और बाद में उसकी मौत हो जाती है, तो रेस्क्यू की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। इसमें मौके पर मौजूद अधिकारियों-कर्मचारियों की जानकारी, इस्तेमाल किए गए उपकरण, रेस्क्यू का समय, अजगर को रखने और स्थानांतरित करने की प्रक्रिया तथा उसे कहां और किस परिस्थिति में छोड़ा गया—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

क्या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम और पर्याप्त उपकरण मौजूद थे?

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रोटोकॉल में सुरक्षित और मानवीय तरीके से वन्यजीवों को संभालने, अनावश्यक तनाव और चोट से बचाने तथा रेस्क्यू की जानकारी दर्ज करने पर जोर दिया जाता है। विभिन्न राज्यों में प्रमाणित स्नेक हैंडलर, प्रशिक्षण, उपयुक्त उपकरण और रेस्क्यू-रिलीज का दस्तावेजीकरण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

ऐसे में पखांजूर की घटना में सवाल सिर्फ अजगर की मौत का नहीं, बल्कि पूरी रेस्क्यू व्यवस्था की पारदर्शिता का है। विभाग को यह बताना चाहिए कि क्या मौके पर प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद थे और क्या अजगर के आकार के अनुरूप रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध थे।

वन्यजीव संरक्षण कानून में अजगर को विशेष संरक्षण

भारत के वन्यजीव संरक्षण कानून में Python वंश (Genus Python) के अजगरों को संरक्षित वन्यजीवों में शामिल किया गया है। मौजूदा कानून के शेड्यूल में Pythons का उल्लेख है।
इसलिए इस घटना में किसी पर सीधे दोषारोपण करने के बजाय यह जरूरी है कि वन विभाग स्वयं पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कराए और यह सार्वजनिक करे कि रेस्क्यू से लेकर रिलीज तक क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।

वन विभाग से सीधे सवाल

# रेस्क्यू के समय मौके पर कौन-कौन से वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे?

# क्या रेस्क्यू करने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों को विभाग से अधिकृत या प्रशिक्षित किया गया था?

# रेस्क्यू के दौरान कौन-कौन से उपकरण इस्तेमाल किए गए?

# अजगर के चोट कब और किस परिस्थिति में आई?

# पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोट के आधार पर क्या विभाग ने कोई आंतरिक जांच शुरू की है?

# अजगर को रेस्क्यू के बाद कहां रखा गया और कितने समय बाद छोड़ा गया?

# रिलीज की जगह और समय का विभागीय रिकॉर्ड या पंचनामा तैयार किया गया था या नहीं?

# रेस्क्यू और रिलीज की फोटो, वीडियो अथवा रिपोर्ट विभाग के पास उपलब्ध है या नहीं?

# भविष्य में बड़े अजगरों के रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित टीम और पर्याप्त उपकरण उपलब्ध कराने की क्या व्यवस्था है?

अजगर की मौत ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—जब वन्यजीव की सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग की है, तो रेस्क्यू से लेकर रिलीज तक हर कदम का रिकॉर्ड और जवाबदेही भी उतनी ही स्पष्ट क्यों नहीं होनी चाहिए?

← Back

Thank you for your response. ✨

📢 विज्ञापन हेतु निवेदन: यदि आपके क्षेत्र से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण स्थानीय खबर, सामाजिक गतिविधि या जनहित से संबंधित जानकारी है, तो कृपया प्रकाशन के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल के साथ साझा करें। विज्ञापन एवं प्रचार-प्रसार हेतु भी आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। मो.9406389697
Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info


WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

पियूष मंडल

मैं परलकोट समाचार का चीफ एडिटर हूं। मेरे लिए पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज की सच्ची आवाज़ है। मैं जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण, आदिवासी समाज और ग्रामीण मुद्दों को निष्पक्ष, जिम्मेदार और जनहित की सोच के साथ लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button
Close

Ad Blocker Detected

We rely on advertising revenue to support our journalism and keep this website running. Please consider disabling your ad blocker to continue accessing our content.