रोजगार के नाम पर ‘धोखे’ का आरोप, सुरजगढ़ माइंस के विरोधी धरने में बाहरी लोगों की मौजूदगी
स्थानीय रोजगार और सड़क की समस्या के नाम पर आंदोलन, लेकिन धरने में शामिल लोगों की भूमिका और जानकारी को लेकर ग्रामीणों ने मांगा जवाब

पखांजूर।
सुरजगढ़ माइंस से जुड़ी भारी वाहनों की आवाजाही और परलकोट की सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच अब आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रोजगार दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र से लोगों को लाकर धरने में शामिल किया गया, जबकि धरने में शामिल कुछ लोगों को स्थानीय समस्याओं और आंदोलन की वास्तविक पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी तक नहीं थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि परलकोट क्षेत्र के लिए सड़क, यातायात, कृषि, रोजगार और जनसुविधाएं वास्तविक मुद्दे हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन होना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यदि रोजगार के नाम पर लोगों को बुलाकर उन्हें आंदोलन में शामिल किया गया और उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है।
धरनास्थल पर मौजूद लोगों से जब आंदोलन के प्रमुख मुद्दों और सुरजगढ़ माइंस से जुड़ी स्थानीय समस्याओं के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो कथित तौर पर कई लोग स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। इसके बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या रोजगार के नाम पर लोगों को सिर्फ भीड़ बढ़ाने के लिए लाया गया था?

स्थानीय लोगों को रोजगार चाहिए, भीड़ नहीं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परलकोट क्षेत्र में रोजगार की आवश्यकता किसी से छिपी नहीं है। यहां के युवाओं को रोजगार, स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता और क्षेत्र में स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग गंभीरता से उठाई जानी चाहिए। लेकिन रोजगार के नाम पर बाहर से लोगों को बुलाकर आंदोलन में शामिल करने की स्थिति बनती है तो इससे वास्तविक स्थानीय बेरोजगार युवाओं के मुद्दे पीछे छूट सकते हैं।
लोगों का सवाल है कि यदि आंदोलन का मुख्य मुद्दा स्थानीय रोजगार है, तो आंदोलन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस कंपनी में कितने स्थानीय लोगों को रोजगार मिला, कितने पदों की मांग है और रोजगार देने की प्रक्रिया क्या है।

माइंस प्रबंधन से भी जवाब की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरजगढ़ माइंस से जुड़े रोजगार, परिवहन और सड़क से संबंधित विषयों पर माइंस प्रबंधन तथा प्रशासन को भी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की वास्तविक व्यवस्था क्या है, बाहरी श्रमिकों की जरूरत क्यों पड़ रही है और स्थानीय युवाओं को कितने अवसर दिए जा रहे हैं, इन सवालों का जवाब सामने आना चाहिए।
साथ ही आंदोलन आयोजकों से भी स्थानीय लोगों ने मांग की है कि यदि आंदोलन वास्तव में परलकोट की जनता के हित में है तो आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका और मांगों को पूरी तरह पारदर्शी रखा जाए।
फिलहाल रोजगार के नाम पर महाराष्ट्र से लोगों को लाने के लगाए जा रहे आरोपों पर आयोजकों और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। उनका पक्ष मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।




