कांग्रेस–भाजपा की नींव रखने वाले नेता बंगाल से, फिर बंगाली परिवारों को भूमि का अधिकार कब ?
कांग्रेस–भाजपा की विरासत में बंगाल, फिर बंगाली समाज से यह दूरी क्यों ?

तीन पीढ़ियों से जमीन के अधिकार की लड़ाई, बंगाली समाज ने उठाए सवाल
पखांजूर क्षेत्र में बंगाली समाज द्वारा भूमि के मालिकाना हक को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद की गई है। समाज के लोगों का कहना है कि दंडकारण्य परियोजना के तहत बसाए गए परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, खेती-किसानी कर रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रहे हैं, लेकिन आज भी कई परिवार भूमि के वैध दस्तावेज और मालिकाना अधिकार से वंचित हैं।
जारी किए गए पोस्टर में दावा किया गया है कि कांग्रेस और भाजपा के शुरुआती दौर में बंगाली समुदाय के नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके बावजूद आज बंगाली समाज के लोग अपनी जमीन के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
समाज के प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि दंडकारण्य परियोजना के अंतर्गत पुनर्वासित परिवारों को जल्द से जल्द भूमि का वैध मालिकाना हक प्रदान किया जाए। उनका कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ आंदोलन नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की मांग है।
बंगाली समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। “न्याय दो, अधिकार दो, सम्मान दो” के नारों के साथ समाज ने अपने संघर्ष को जारी रखने की बात कही है।




