परलकोट में ‘राहु-केतु’ की एंट्री! सड़क खा रहे भारी वाहन, पुल भी निशाने पर

पखांजूर।
परलकोट की सड़कों पर सुरजागढ़ माइंस के भारी वाहनों की आवाजाही अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनती जा रही है। स्थानीय लोगों ने मजाक में इन भारी वाहनों का नाम ‘राहु-केतु’ रख दिया है। वजह भी दिलचस्प है—लोगों का कहना है कि ये वाहन सड़क को धीरे-धीरे निगल रहे हैं और पुराने पुल-पुलियों पर भी लगातार भारी दबाव पड़ रहा है।

तस्वीरों में भारी वाहन पुल से गुजरते नजर आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पहले से खराब सड़क, गड्ढे और वाहनों से उड़ती धूल ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है। हाल ही में ओवरलोड वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने की मांग को लेकर SDM पखांजूर को आवेदन भी दिया गया था, जिसमें सड़क और करीब 60 वर्ष पुराने अंजली पुल की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सूर्य ग्रहण में राहु-केतु सूर्य को ढक देते हैं, लेकिन परलकोट के इन ‘राहु-केतुओं’ का असर थोड़ा अलग है—ये सड़क को ढकने के बजाय सड़क को ही खाते नजर आते हैं। धूल इतनी कि वाहन पीछे से निकले तो सामने वाला कुछ देर तक दिखाई दे या न दे, यह भगवान भरोसे!
अब सवाल सुरजागढ़ माइंस प्रबंधन से भी है कि क्या भारी वाहनों के संचालन के लिए सड़क और पुल की क्षमता का पर्याप्त ध्यान रखा जा रहा है? और शासन-प्रशासन से सवाल यह कि कार्रवाई कब होगी?
नेताओं की बयानबाजी भी कम दिलचस्प नहीं। सड़क पर गड्ढे और धूल जनता को साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई कब दिखाई देगी, यह अभी भी सवाल है। चुनावी मौसम में सड़क के गड्ढे भी मुद्दा बनते हैं और भाषणों में विकास भी खूब दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर जनता आज भी धूल ही फांक रही है।
अब परलकोट की जनता की नजर प्रशासन पर है—राहु-केतु कब हटेंगे और सड़क-पुल को राहत कब मिलेगी? वरना कहीं ऐसा न हो कि अगली बार लोग सड़क की मरम्मत नहीं, बल्कि उसकी ‘कुंडली’ बनवाने लगें।





