सुरजागढ़ माइंस के ‘राहु-केतु’ ने निगलनी शुरू की परलकोट की लाइफलाइन
परलकोट में ‘राहु-केतु’ का कहर! सड़क खाने निकली भारी गाड़ी कापसी में खुद ही फंस गई

पखांजूर।
सुरजागढ़ माइंस की भारी-भरकम गाड़ियों को परलकोट क्षेत्र में लोग मजाक-मजाक में ‘राहु-केतु’ कहने लगे हैं। वजह साफ है—जैसे पौराणिक कथाओं में राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा को निगलने के लिए जाने जाते हैं, वैसे ही क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ये भारी वाहन परलकोट की लाइफलाइन सड़क को धीरे-धीरे निगलने में लगे हैं।
लेकिन अब कहानी में नया ट्विस्ट आ गया है। सड़क को निगलने निकली भारी गाड़ी कापसी इलाके में सड़क के बीचों-बीच खुद ही फंस गई, जिसके चलते वाहनों की लंबी कतार लग गई। यानी राहु-केतु इस बार सड़क खाने निकले थे, लेकिन सड़क ने ही उन्हें बीच रास्तेरोककर कह दिया—“पहले मुझे पार करके दिखाओ!”

क्षेत्र की सड़क पहले से ही जगह-जगह गड्ढों और खराब स्थिति से जूझ रही है। ऊपर से भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और उड़ती धूल ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अब कापसी में ट्रक फंसने से यातायात भी प्रभावित हुआ और सड़क की वास्तविक हालत एक बार फिर सामने आ गई।
सबसे बड़ा सवाल शासन-प्रशासन से है—जब सड़क की हालत सबके सामने है, भारी वाहनों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आ रहे हैं, शिकायतें भी हो चुकी हैं, तो आखिर कार्रवाई के लिए और कितनी ‘राहु-केतु लीला’ देखना बाकी है?
स्थानीय नेताओं के लिए भी यह तस्वीर किसी आईने से कम नहीं। बयान और आश्वासन अपनी जगह हैं, लेकिन जनता को अब बयान नहीं, सड़क पर कार्रवाई चाहिए। गड्ढे रोज बढ़ रहे हैं, भारी वाहन रोज दौड़ रहे हैं और जनता रोज उसी रास्ते से गुजर रही है।

फिलहाल कापसी में राहु-केतु की गाड़ी खुद ही फंस गई है और पीछे वाहनों की लंबी कतार लग गई। अब क्षेत्रवासी मजाक में कह रहे हैं—“सड़क खाने निकले थे साहब, लेकिन आज सड़क ने ही राहु-केतु को निगल लिया!”
अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘ग्रहण’ को हटाता है या फिर जनता इसी तरह धूल, गड्ढे और जाम के बीच परलकोट की लाइफलाइन का भविष्य तलाशती रहेगी।





