मुक्तिधाम का रास्ता गड्ढों में, नेताओं की आंखों पर पट्टी! अंतिम यात्रा में जनता परेशान, पखांजूर के जनप्रतिनिधि बने ‘धृतराष्ट्र’
मुक्तिधाम में शव यात्रा को रास्ता नहीं, नेताओं को दिखाई नहीं देता!

पखांजूर में बदहाल मुक्तिधाम की हकीकत सामने, अंतिम यात्रा में भी लोगों को उठानी पड़ी परेशानी; जनता बोली—नेताओं की आंखों पर आखिर कैसी पट्टी?
पखांजूर।
जिस रास्ते से इंसान अपने जीवन की अंतिम यात्रा पर जाता है, अगर उस रास्ते पर भी गड्ढों से बचकर चलना पड़े तो इसे विकास कहें या व्यवस्था का अंतिम संस्कार?
आज पखांजूर मंडी के पास स्थित मुक्तिधाम में शव ले जाते समय लोगों को रास्ते की बदहाली के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। रास्ता बड़े-बड़े गड्ढों और उबड़-खाबड़ हालत में है। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को भी संभल-संभलकर आगे बढ़ना पड़ा।
विडंबना देखिए—मुक्तिधाम सामने है, बदहाली सामने है, जनता की परेशानी सामने है, लेकिन जिम्मेदार नेताओं को कुछ दिखाई नहीं दे रहा!
पखांजूर की राजनीति में शायद अब एक नया अध्याय शुरू हो गया है। नेताओं की आंखों पर ऐसी ‘धृतराष्ट्र पट्टी’ बंध गई है कि जनता की परेशानी भी दिखाई नहीं देती। अंतर बस इतना है कि महाभारत में धृतराष्ट्र की आंखें नहीं थीं, लेकिन यहां आंखें होते हुए भी व्यवस्था की बदहाली दिखाई नहीं दे रही।

जीते जी सड़क, मरने के बाद भी गड्ढे!
सवाल यह है कि आखिर मुक्तिधाम तक पहुंचने वाला रास्ता कब सुधरेगा? क्या नगर के विकास की सूची में मुक्तिधाम का नाम ही नहीं है? क्या यहां सुविधा देने के लिए किसी वीआईपी के अंतिम संस्कार का इंतजार किया जाएगा?
लोगों का कहना है कि जीते जी आम आदमी गड्ढों वाली सड़कों से परेशान है और मरने के बाद भी उसी गड्ढों वाली सड़क से अंतिम यात्रा करनी पड़ रही है।
और सबसे बड़ा सवाल स्थानीय जनप्रतिनिधियों से है—क्या इस रास्ते पर कभी किसी नेता की नजर पड़ेगी या नेताओं की आंखों पर बंधी पट्टी तभी खुलेगी जब जनता सवाल पूछना बंद कर देगी?

मुक्तिधाम कोई पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि नगर की ऐसी मूलभूत सुविधा है जहां हर परिवार को कभी न कभी जाना ही पड़ता है। इसलिए यहां सड़क, पानी, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षित मुक्तिधाम जैसी सुविधाएं कोई एहसान नहीं, बल्कि जनता का अधिकार हैं।
अब देखना यह है कि आज की यह परेशानी नेताओं की आंखों से धृतराष्ट्र वाली पट्टी हटाती है या फिर मुक्तिधाम की तरह जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता भी अपने हाल पर छोड़ दी जाती है।




