किसी अनहोनी का इंतजार क्यों? परलकोट में कुत्ता-सांप काटने के इलाज की व्यवस्था हर अस्पताल में हो सुनिश्चित

परलकोट।
अभी तक किसी घटना के होने का इंतजार करने के बजाय कुत्ता, बंदर या सांप के काटने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए परलकोट क्षेत्र में पहले से पुख्ता स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार रखना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी घटना होने के बाद मरीज और उसके परिजन इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की तलाश में इधर-उधर भटकते हैं। ऐसे समय में एक-एक मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

परलकोट क्षेत्र में इस गंभीर विषय को लेकर स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन को अभी से संज्ञान लेना चाहिए। क्षेत्र के छोटे-बड़े सभी सरकारी अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा नियमों के अंतर्गत आने वाले निजी अस्पतालों में कुत्ता-बंदर काटने और सर्पदंश के मरीजों के लिए आवश्यक प्राथमिक उपचार, एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV), तथा जहां चिकित्सकीय रूप से आवश्यक हो वहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) तक तत्काल पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मरीज अस्पताल ढूंढता न फिरे, इलाज की व्यवस्था पहले से तैयार हो
ग्रामीण इलाकों में समस्या यह है कि आपात स्थिति आने के बाद परिजन सबसे पहले यह पता लगाने में लग जाते हैं कि “वैक्सीन कहां मिलेगी?” या “सांप के काटने की दवा किस अस्पताल में है?” यही देरी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
इसलिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि परलकोट क्षेत्र के प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र की आपातकालीन तैयारी और दवा उपलब्धता की नियमित समीक्षा करे। जहां किसी विशेष दवा का स्टॉक रखना नियमों के अनुसार संभव या अनिवार्य नहीं है, वहां कम से कम तत्काल प्राथमिक उपचार और बिना देरी उच्च केंद्र में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
अनहोनी के बाद जागना नहीं, पहले से तैयारी जरूरी
सवाल सीधा है—क्या प्रशासन किसी ग्रामीण के सांप या कुत्ते के काटने के बाद अस्पतालों की व्यवस्था जांचेगा, या उससे पहले तैयारी करेगा?
ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए परलकोट क्षेत्र के सभी सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था की समीक्षा करे और स्पष्ट व्यवस्था बनाए कि आपात स्थिति में मरीज को इलाज और जरूरी दवा के लिए भटकना न पड़े।
किसी की जान जाने के बाद व्यवस्था सुधारने का कोई मतलब नहीं। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि खतरा सामने आने से पहले ही इलाज की व्यवस्था तैयार रखी जाए।




